बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री (Former Prime Minister) Sheikh Hasina ने पहली बार साफ तौर पर ऐलान किया है कि वे इस साल दिसंबर में भारत से बांग्लादेश वापस लौटेंगी — भले ही उन्हें वहां मौत की सज़ा (Death Sentence) सुनाई जा चुकी है। Reuters को दिए एक लंबे Interview में उन्होंने कहा, “वे मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, यहां तक कि मार भी सकते हैं। फिर भी मुझे जाना है।”
क्यों हो रही है ये चर्चा?
Sheikh Hasina 2024 में छात्रों के नेतृत्व (Student-led) वाले बड़े प्रदर्शनों के बाद अपनी 20 साल पुरानी सत्ता गंवाकर भारत भाग गई थीं। नवंबर 2026 में बांग्लादेश के वॉर क्राइम्स ट्रिब्यूनल (War Crimes Tribunal) ने उन्हें अनुपस्थिति में मौत की सज़ा (Death Sentence in Absentia) सुनाई, आरोप था कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई का आदेश दिया, जिसमें करीब 1400 लोगों की जान गई। Hasina ने हमेशा इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित (Politically Motivated) बताते हुए खारिज किया है।
“मुझे अपनी ही मिट्टी पर जाना है”
इंटरव्यू में Hasina ने अपने फैसले की वजह भी बताई: “अगर मौत आनी है, तो मैं चाहती हूं वो मेरी अपनी मिट्टी पर आए, जहां मेरे माता-पिता दफन हैं और जहां उनका खून बहाया गया था।” (उनके पिता, बांग्लादेश के संस्थापक नेता, की 1975 में एक सैन्य तख्तापलट में हत्या कर दी गई थी।)
उन्होंने ये भी कहा कि उनकी पार्टी Awami League के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भारी दमन (Repression) हो रहा है, और यही वजह है कि वे लौटने का फैसला ले रही हैं।
साथ में और भी नेता लौटेंगे
Hasina अकेली नहीं लौटेंगी — उन्होंने अपनी पार्टी के अन्य निर्वासित (Exiled) नेताओं से भी साथ लौटने की अपील की है, जिनमें पूर्व गृह मंत्री (Former Home Minister) असदुज्जमां खान कमाल भी शामिल हैं, जिन्हें भी मौत की सज़ा मिल चुकी है। Hasina के मुताबिक, “हम सब मिलकर कोर्ट में सरेंडर करेंगे।”
उन्होंने बताया कि निर्वासन (Exile) में रहते हुए भी वे बांग्लादेश की 300 संसदीय सीटों में से 125 सीटों पर ऑनलाइन बैठकें कर चुकी हैं, ताकि पार्टी को दोबारा संगठित (Reorganise) किया जा सके।
भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर असर
Hasina का भारत में रहना पहले से ही दोनों देशों के बीच तनाव की बड़ी वजह रहा है। बांग्लादेश सरकार लगातार भारत से उनके प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग करती रही है, जबकि भारत ने अभी तक इस पर कोई ठोस फैसला सार्वजनिक नहीं किया। विशेषज्ञों (Experts) का मानना है कि अगर Hasina खुद वापस लौटकर सरेंडर करती हैं, तो इससे भारत पर बना दबाव कुछ कम हो सकता है।
बांग्लादेश सरकार की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबेद इस्लाम ने हाल ही में कहा था कि प्रत्यर्पण को लेकर कूटनीतिक प्रयास (Diplomatic Efforts) लगातार जारी हैं।
आगे क्या होगा?
Hasina का ये ऐलान बांग्लादेश की राजनीति में नया तूफान ला सकता है, खासकर तब जब देश 12 फरवरी को होने वाले चुनावों (Elections) की तैयारी कर रहा है, जिनमें उनकी पार्टी Awami League को हिस्सा लेने से पहले ही रोका जा चुका है। उनकी वापसी से एक तरफ जहां राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है, वहीं दूसरी तरफ भारत-बांग्लादेश संबंधों में भी नई हलचल देखने को मिल सकती है।
Sheikh Hasina का 20 साल लंबा शासन
Sheikh Hasina बांग्लादेश की सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाली नेता थीं। उनके कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था (Economy) में बड़ा बदलाव आया — लाखों लोग गरीबी से बाहर निकले और बांग्लादेश दुनिया का एक बड़ा गारमेंट एक्सपोर्ट हब (Garment Export Hub) बन गया। लेकिन इन उपलब्धियों के साथ-साथ उन पर तानाशाही रवैया (Authoritarian Rule), विपक्ष के दमन और चुनावों में धांधली (Rigged Elections) के भी गंभीर आरोप लगते रहे — आरोप जिन्हें वे हमेशा खारिज करती रहीं।

